क्या गावे घर दूर, दीवाने बन्दे क्या-Kabir Ke Shabd-kyaa gaave ghar dur, divaane bande kyaa।

SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
क्या गावे घर दूर, दीवाने बन्दे क्या।
शेख फरीद कुएं में लटके, होगए चकनाचूर।
सुल्तानी तज गए बलख को, तज 16 सहस्र हूर।।

गोपीचंद भरथरी राजा, सिर में डारि धूर।
जन रविदास कबीर कमाला, सन्मुख मिले हजूर।।

दोनों दीन मुक्त को चाहवें, खावें गऊ ओर सूर।
दास गरीब उधार नहीं है, सौदा पुरम्पुर।।

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