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माया जाल ने मोह लिया रे पिंजरे वाला तोता-Kabir Ke Shabd-maayaa jaal ne moh liyaa re pinjre vaalaa totaa।

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Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
माया जाल ने मोह लिया रे पिंजरे वाला तोता।
झिलमिल पिंजरा हुआ पुराना,
गया समय फिर हाथ ना आना
नींद नशे की सो लिया रे।

निर्गुण पिंजरा अब क्या होता
दाग जिगर का कोन्या धोता
निर्मल क्यों ना हो लिया रे।

एक दिन काल बलि जब आवे
गर्दन तेरी तोड़ ले जावे
जिस दिन उस ने टोह लिया रे।

मुंशी राम तू तोता पढ़जा
सूरत शब्द को चित्त में धर जा
समय कीमती खो लिया रे।

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