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मेरा मन बानिया जी,अपनी बाण कदे ना छोड़े-Kabir Ke Shabd-meraa man baaniyaa ji,apni baan kade naa chhode।

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Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
मेरा मन बानिया जी,अपनी बाण कदे ना छोड़े।
हेरा फेरी के दो पलड़े,अंदर कानी डांडी।

मन में छल कपट हृदय में,हाट चौरासी मांडी।
पुरे बाट परे सरकावे,कमती बाट टटोले।

पासंग माहीं डांडी मारे, मीठा-२ बोले।
घर में इस के चतर बनियानी,छीन-२ में चित्त चोरे।

कुनबा इस का बड़ा हरामी,अमृत में विष घोले ।
जल में वोही थल में वोही,घट-२ में हर बोले।

कह कबीर सुनो भाई साधो,बिन मतलब नहीं बोले।

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