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मेरे मनवा राजा, जायला कौनसी घाटी-Kabir Ke Shabd-mere manvaa raajaa, jaaylaa kaunsi ghaati।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
मेरे मनवा राजा, जायला कौनसी घाटी।
आगै भरम की टाटी।।

कौन दिशा से आई मन पवना,कौन दिशा जासी।
कौन दिशा ने भजन उभरिया, कौन दिशा रम जासी।।

अगम दिशा से आई पवना,पछम दिशा नै जासी।
बंकनाल से भजन उभरिया, ररंकार में रम जासी।।

ऊंची नींची सूरत करै नै, चन्दा जोतरे वासी।
तत्व नाम को खेत बुडले, जाग्या कर दिन राती।।

बारह आंगल सीमता, सोलह आंगल फांती।
सवा हाथ रो भगवां चोलो, त्रिवेणी के घाटी।।

दीपक में एक दीपक दरसै, दीपक में एक झाँई।
झाँई में परछाई दरसें,वहां बसै मेरा साँई।।

शरण मछँदर सुनो जति गोरख, जात हमारी चेली।
तेल-२ सो काढ़ लिया,खल पशुवां ने मेली।।

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