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म्हारे गुरुआ रामरस भीनी, या चादर झीनी रे झीनी जी-Kabir Ke Shabd-mhaare guruaa raamaras bhini, yaa chaadar jhini re jhini ji।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
म्हारे गुरुआ रामरस भीनी, या चादर झीनी रे झीनी जी।
पांच तत्व का बना चरखला,  तीन गुणों से पिनही
सत्तगुरु म्हारा बनाजुलाहा, या ठोक-२ भर दीन्ही जी।।

जब या चादर बन के आई, घर धोबी के दीन्ही।
सूरत शिला पे दिया फटकारा, जब या उज्जल किन्ही जी।।

जब या चादर धो के आई,  रँगरेजा को दीन्ही।
वो रँगरेजा ऐसो कहिये, या लाल-२ रंग दीन्ही जी।।

ध्रुव ने ओढ़ी प्रह्लाद ने ओढ़ी, सुखदेव ने निर्मल किन्ही जी।
साहिब कबीरा ने ऎसी ओढ़ी, या न्यू की न्यू धर दीन्ही जी।।

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