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म्हारे सत्तगुरु बिना, कौन बन्धावे म्हारी धीर-Kabir Ke Shabd-mhaare sattaguru binaa, kaun bandhaave mhaari dhir।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
म्हारे सत्तगुरु बिना, कौन बन्धावे म्हारी धीर।
कांसीपुरी के बाह्मन बनिये, लिख-२ भेजें चीर।
माह का महीना दिन चौदस का, कमल में मिले कबीर।।

तेरस बीती चौदस बीती, उमड़ पड़ी है भीड़।
गली-२ में बुझ्न लागे, कदसी के आवेंगे कबीर।।

भई टूटा झोंपड़ा छान पुरानी, जिसमे बसे कबीर
बाहर लिकड़ के देखन लाग्या, बहे नैन से नीर।।

ना कोए पैसा ना कोए धेला, न कोए धंधा सीर।
साहूकार के लेखा कोन्या, कौन बनी तस्वीर।
एक लँगोटी कांधे कमरिया, वन को चले कबीर।
वन में रहना वन में सहना, वन में बसेंगे कबीर।।

आप बने केशव बंजारा, बालक बने कबीर।
अंत सुनना अंत कहा, अंत भरे सब नीर।।

बूरा चावल घी ताजा, जीमन ने भोजन खीर।
आप घाल जिमावन लागे, भर भर थाल कबीर।।

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