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मुकदमा होग्या रे तुम कर लो एक वकील-Kabir Ke Shabd-mukadmaa hogyaa re tum kar lo ek vakil।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
मुकदमा होग्या रे तुम कर लो एक वकील।
उस दिन की करो कमाई रे, आवेंगे चार सिपाही रे।
तेरी देगा कौन गवाही रे, जब आवेगी तामील।।

तेरा धुर का साथ कटेगा रे, तेरा कुनबा सेरां नटेगा रे।
मन एकला खड़ा पिटेगा रे, तनै देखी नहीं तहसील।।

ना कमती तखड़ी तोलो रे, मत झूठ किसै तैं बोलो रे।
तुम धर्म हिय में तोलो रे, ना होना पड़े जलील।।

जब धर्मराज के जावे रे, तेरा लेखा खोल दिखावे रे।
मन एकला खड़ा लखावें रे, तेरे ठुकें हाथ मे कील।।

तब इत उत ने झांके रे, तेरै पड़े डंडों के पटाखे रे।
तेरे रुकजा चारों नाके रे, चप्पे-२ पै पड़जा नील।।

पड़ा घोर नरक में रोवे रे, रो रो के अँखियाँ खोवे रे।
कदे जागे कदे सोवै रे, तेरे सिर मण्डरावें चील।।

गुरु मंगत कथ के गावे रे, भाषा मे छंद बनावे रे।
वे सब को न्यू समझावे रे, म्हारे शिष्य हैं बड़े सुशील।।

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