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मुखड़ा क्या देखे दर्पण में, तेरे दया धर्म नहीं मन मे-Kabir Ke Shabd-mukhdaa kyaa dekhe darpan men, tere dayaa dharm nahin man me।।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
मुखड़ा क्या देखे दर्पण में, तेरे दया धर्म नहीं मन मे।।
आम की डाली पे कोयल राजी, तोता राजी बागन में।
घरवाली तो घर मे राजी,  फक्कड़ राजी बन में।।

कागज की एक नाव बनाई,छोड़ी गंगाजल में।
धर्मी-२ पार उतरगे पापी डूबे जल में।।

बांधे पाग मरोड़े मूंछे, तेल चुवे जुल्फ़न में।
गली-२ की सखी रिझाइ, दाग लगा लिया तन में।।

पाथर की एक नाव बनाई, उतरा गहरे जल में।
कह कबीर सुनो भई साधो, ये क्या लड़ेंगे रण में।।

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