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नर जन्म अमोलक खोया रे-Kabir Ke Shabd-nar janm amolak khoyaa re।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
नर जन्म अमोलक खोया रे।
सुधा समंदर के ढिंग जाकर, दिल का दाग न धोया रे।।

जम का जाल काल नद भारी,  तैं क्यूँ मूल बिगोया रे।
सपन सरूप कनक और कामन, इन्ही में सुख सोया रे।।

अंत समय अमृत कहां पाइये।
राम विषय विष बोया रे।।

नित्यानन्द बिन भजन गुमानी,
सो नर जुग जुग रोया रे।।

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