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पिया क्यूं ना लइ हो खबरिया म्हारी-Kabir Ke Shabd-piyaa kyun naa le ho khabariyaa mhaari।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
पिया क्यूं ना लइ हो खबरिया म्हारी।
निशि वासर मेरी पलक न लागे, बढ़ गई बेदन भारी।।

आंगन भयो विदेश सखी री, प्रीतम लइ अटारी।
मैले भेष उन्मने लौचन, झुर-२ हो गई कारी।।

पलक-२मोहे युग सम बीते, जब से नाथ बिसारी।
आप अगमपुर जाय विराजे, हम भव जल बीच डारी।।

हमसे भूल हुई या तुम ही चुके, मेरे मीत मुरारी।
नित्यानन्द महबूब गुमानी, तुम जीते हम हारी।।

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