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रै तनै बेरा कोन्या बात बिगड़गी तेरी - Kabir Ke Shabd-rai tanai beraa konyaa baat bigdgi teri।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
रै तनै बेरा कोन्या बात बिगड़गी तेरी।
नो दस मास गर्भ में झूला, मूत की नदियां बहरी।
छोहरा जाया द्रव लुटाया, बेटा-२ कह रही।।
बालापन हंस खेल बिताया, निर्मल बुद्धि तेरी।
आई जवानी बढ़ी दीवानी, छाय गई अंधेरी।।
हरि ना ध्याया जन्म गंवाया, कर रहा मेरा मेरी।
जिनने तो तूँ प्यारा समझे, वे हैं पक्के बैरी।।
बूढा हुआ कफ वायु ने घेरा, घर मे ममता गहरी।
हाथ पांव चालन तैं रहगे, मन की मन मे रहरी।।
चुन-२ लकड़ी चिता बनाई, चौगरदे दइ घेरी।
किशनदास सत्तगुरु समझावे, जल बुझ हो गई ढ़ेरी।

सत्त साहिब

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