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साधो कीड़ी ने हाथी जाया रे साधो-Kabir Ke Shabd-saadho kidi ne haathi jaayaa re saadho।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
साधो कीड़ी ने हाथी जाया रे साधो।
उल्टा ज्ञान सुलट के देखा,जब ये मन पतियाया।।

कोठी भरी नाज के भीतर, खेत किसान को बाहे।
बकरी चढ़ी सिंह सिर ऊपर,गुरु बिन कौन निबाहे।।

बून्द माहीं से समुद्र निकस्या, मावस माहीं से चंदा।
मोती मा से सीप निकाली, जब ही भये आनन्दा।।

धागे को उठ गुदड़ी सीमे, नित जोगी को ओढ़े।
जोगी में से मढ़ी निकल कर,पांव पसारे पौढ़े।।

तरवर में एक बाग लगाया, तां में उपजा माली।
साह चुरावे अपने धन को, चोर करे रखवारी।।

सर्प माहीं से बाम्बी निकली, निर्मल होगया प्राणी।
तृण में पर्वत उल्टा समाया, ऐसी अकथ कहानी।।

स्वामी गुमानी सतगुरु पूरा,जो ये सैन बतावै।
नित्यानन्द या पद को खोजे, आदि अंत को गावै।।

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