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सोवनिया उठ जाग रे तेरी गाँठ कटे सै-Kabir Ke Shabd-sovaniyaa uth jaag re teri gaanth kate sai।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
सोवनिया उठ जाग रे तेरी गाँठ कटे सै।
सो गया चादर तां रे,तेरी उम्र घटे सै।।

साहूकार की बरते पूंजी, खुला पड़ा तेरा ताला कुंजी।
चोर रहे से लाग रे तेरा माल लुटे से।।

साहूकार का आवे हरकारा, मूल ब्याज देना हो सारा।
डिग्री हो निर्भग रै, इक दिन रोज घटे सै।।

ये तन समझो पूर्ण खजाना, धर्म रीत का सिख कमाना।
कटे चौरासी की लाग रे, जब तने खबर पटे सै।।

हरिदास की बुद्धि खोटी, कदे ना लाइ ज्ञान कसौटी।
उठ सत्संग में लाग रै, उड़े हड़ी प्रेम बटें सै।।

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