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सुमर-२ नर उतरो पार, भवसागर की तीक्ष्ण धार-Kabir Ke Shabd-sumar-2 nar utro paar, bhavsaagar ki tikshn dhaar।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
सुमर-२ नर उतरो पार, भवसागर की तीक्ष्ण धार।
धर्म जहाज में ही चढ़ लीजो,  सम्भल-२ ता में पग दीजो।
शर्म कर मन को संगी कीजो हरि मार्ग को लागो यार।।

बादवान पुनि ताहि चलावे, पाप भरे तो हलन न पावे।
काम क्रोध लूटन को आवे, सावधान हो करो सम्भाल।।

मान पहाड़ी तहाँ अङत है, आशा तृष्णा भँवर पड़त हैं।
पांच मगर जहां चोट करत हैं, ज्ञान आंख बल चलो निहार।।

ध्यान धनी का हृदय धारे, गुरु कृपा से लगे किनारे।
जब तेरी नैया उतरे पारे, जन्म मरण दुःख विपदा तार।।

चौथे पद में आनंद पावे, इस जग में तूँ फिर न आवे।
चरणदास गुरु देव चितावे, सहजोबाई यही विचार।।

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