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तेरा किस ने लाल चुराया, दर खुले ना टूटे ताले-Kabir Ke Shabd-teraa kis ne laal churaayaa, dar khule naa tute taale।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
तेरा किस ने लाल चुराया, दर खुले ना टूटे ताले।
नो दरवाजे दसवीं मोरी, सभी बन्द भई कैसे चोरी।

माल हाथ से गयो बरजोरी, भेद किसे न नहीं पाया।
दस घर में छूटे फव्वारे।।

नगद माल वो कसके लेगये,  और खड़े सब ऐसे ही रह गए
कोई कहे दे गये कोइ कह वे गए।
पकड़ कोई ना पाया, सब खड़े रहे पहरे वाले।।

तीन लोक ओर उदय अस्त लौ, बड़े-२हाकिम फिरें गस्तलौ।
चौकी बैठी बन्दोबस्त लौ,
देख कोई ना पाया, बड़ी युक्ति से डाले।।

माल हाथ से सभी हिराना,  उसी माल का पता लगाना।
गंगादास कहे मुल्क बिराना,
नहीं खर्चा अब पाय, सब खड़े रहे पहरे वाले।।


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