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तेरी बीती उमरिया छूटेगी नगरिया, तुं चढ़के जाएगा काठ की घोड़ी-Kabir Ke Shabd-teri biti umariyaa chhutegi nagariyaa, tun chdhke jaaagaa kaath ki ghodi।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
तेरी बीती उमरिया छूटेगी नगरिया,  तुं चढ़के जाएगा काठ की घोड़ी।
तूने रब से आत्मा न जोड़ी।।

घड़ियां सुमरन की बन्दे लाभ उठाले, रब को मानले बन्दे जोत जगाले।
एक भजन यही साथ चलेगा, तेरी काया की कीमत ना कोड़ी।।

मात पिता भाई कोई नहीं अपना, साँसों की डोरी छूटे, दुःख जीवन सपना।
जपले बैठ कर ज्यादा गुजर गई, आगे है जिंदगी थोड़ी।।

ममता कुटुम्ब की रखती जकड़ कै, मेरा मेरी झूठी तेरी, चलै क्यूं अकड़ कै।
रब के न कि श्रद्धा छोड़ दी, पर या आदत न गन्दी छोड़ी।।

दर्शन वेला आज चरण कमल में, कल करै आज, छोड़ मत कल पै।
रब से मिलन की मंजिल दूर ना, तुं चढ़ का पौड़ी पौड़ी।।

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