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ये तरने का घाट, भूले मनवा समझिये रे भाई-Kabir Ke Shabd-ye tarne kaa ghaat, bhule manvaa samajhiye re bhaai।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
ये तरने का घाट, भूले मनवा समझिये रे भाई।
कथनी के सूरे घने वै, थोथे बांधें हथियार।
भई रण में तो कोए-२ डटे,जित बाजें तलवार।।

सुरा रण में जाए कै रे, किस की देखै बाट।
ज्यूँ-२ पग आगै धरै रे, आप कटै या दे काट।।

सती चिता पै चढ़ गई, वा कर प्रीतम से प्यार।
तन मन अपना सर्वस सौंपा, मिली राख में राख।।

हीरा बीच बाजार में,सब परखें साहूकार।
पर ना मिलें पारखी रे, सब की अक्ल गंवार।।

तन मन सोंपो गुरु अपने को,सत्त शब्द पै चाल।
भई मुश्किल तैं आसान हुआ रे, जब तैं सौंप दी जान।।

कह कबीर सुनो भइ साधो,कुछ तो करो विचार।
चेता जा तै चेत बावले,ना खा जागा कपटी काल।।

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