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कबीर रुकजा हो पापी मन - Kabir rukja ho papi man

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 


कबीर के शब्द

रुकजा ओ पापी मन रुकजा, सद्गुरु चरणों मे झुक जा।
तेरा शीश तलै पग ऊपर थे, सद्गुरु जी तैं कौल करा।
मैं भजन करूँगा तेरा रे, तनै गर्भ बीच मे वचन भरा।।
इब आशा तृष्णा में फंस गया।।  

तनै बाल अवस्था गंवाई, तूँ खेला और खाया रे।
जब जवानी चढ़ के आई, उस मालिक को भुलाया रे।।
फेर आवै बुढापा सुकड़ जा।। 

बिन सद्गुरु के कौन बचाए, जब यम पकड़ ले जावेगा।
पेश तेरी उड़े चाले ना, पिंजरे ने तोड़ बगावैगा।
जब काल की जेल में ठुकजा।।

तनै छः सो मस्ताना समझावै, इबतो हो जा बैरागी रे।
सत्संग सुमरण वाणी में, तेरी सुरतां कोन्या लागी रे।
इब शब्द रंग में रंग जा।।

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