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करो हरि का भजन - karo hari ka bhajan - kabir ke shabd

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Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द

करो हरि का भजन ,या मंजिल पार हो जागी
आगै बरतन खातिर पूंजी, त्यार ही जागी।।

इस दुनिया में आ के बन्दे, कर लीजे दो काम।
देने को टुकड़ा भला, औऱ लेने को हरी नाम।
रामनाम की भूल से बस, दुःख हैं आठों याम।
उठत बैठत चलते फिरते, कभी न भूलो राम।
गफलत में या काया तेरी, बेकार हो जागी।।

चाहिए था कुछ ब्याज कमाना, आन गंवाया मूल।
जो जाएगा साहूकार पे, तो पल्ले पड़ेगी धूल।
सहम विषयों में पागल हो के, खोया जन्म फिजूल।
खाली हाथ जा यहां से चल के, जा आइ बाई भूल।
गूँगी होके जीभ तेरी, लाचार हो जागी।।

आशा तृष्णा ममता तज,दो दिन का महमान।
नकली खेल मदारी का, कदे कहावै हैवान।
मनसा वाचा कर्मन से ला, हरि भजन में ध्यान।
थोड़ी सी हिम्मत में खुश हो, फेर सुनै भगवान।
कर ले हिम्मत, मेहनत में सुममार हो जागी।।

रामनाम के सुमरन में हो, थोड़ा सा रुख हो।
विघ्न क्लेश मिटै सारे, नहीं तन मन मे दुःख हो।
अंत मता सो गता कहैं जै, हरि नाम मुख हो।

चन्द्र भान सन्त बतलावें, आगे का सुख हो।
हरि नाम की नाव तेरा, आधार हो जागी।।

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