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माया हे रंग बादली हे जामे - maya he rang badli hai jaame - Kabir Ke Shabd

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 


कबीर के शब्द

माया हे रंग बादली हे जामे, चंदा भी दरसै ना।।
काया में माया बसे रे, ज्यूँ पत्थर में आग।
जो तेरी सुरतां हरि मिलन की, चकमक होके लाग।।

चोर चुराईं तुम्बड़ी रे, दाबी जल के माए।
वो दाबे, वा उबरे रे, करनी तो छानी नाए।।

काम क्रोध की बनी रे बदलियां, गर्ज रहा अहंकार।
आशा तृष्णा बिजली रे, भीज रहा संसार।।

ज्ञान पवन जबसे चली रे, बादल दिये उड़ाए।
कह कबीर सुनो भई साधो, चन्दा भी दरसा आए।।

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