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मैंने गुरु मिले रविदास - meine guru mile ravidaas - Kabir ke shabd

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 


कबीर के शब्द

मैने गुरु मिले रविदास, सासरे मैं ना जांगी।
एक बेल की दोय तूम्बड़ी, एकै उनकी जात।
एक फिरे डुलती गलियों में, एक सन्ता के हाथ।।

एक झुंड के दो सरकंडे, एकै उनकी जात।
एक के बनते खरी खरोले, एक कलम धनी के हाथ।
एक माटी के दो बर्तन भई, एकै उनकी जात।
एक में घलता माखन मिश्री, एक धोबी के घाट।।

आए गए कि पनिहा गांठे, बैठा सरे बाज़ार।
भूखे ने दो रोटी भी देता, जिसकी जात चमार।।

काख मा तें रापी काढ़ी, चीरा अपना गात।
चार जन्म के चार जनेऊ आठ गांठ नो तार।।

अपने महल से मीरा उतरी, घट में गंगा न्हाय।
पाँव पूजूँ गुरु रैदास के, अमर लोक ले जाए।।

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