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समस्याएँ - Problems

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समस्याएँ - Problems

अगर आप के जीवन में बहुत सारी समस्याएं हैं तो खुश हो जाइए। क्योंकि आपका जीवन बदलने वाला है। एक छोटी सी कहानी अपनी बात को समझाने के लिए। एक बार एक किसान अपने खेत में बैठा हुआ भगवान को गालियाँ दे रहा था।
भगवान उसकी गालियां सुनते सुनते बड़े परेशान हो जाते हैं। उसके पास आते हैं और उससे पूछते हैं क्या हुआ भाई। तुम मुझे इतनी गालियां क्यों दे रहे हो।
वह किसान कहता है। मुझे नहीं पता आपको भगवान किसने बना दिया। आपको कोई भी कार्य सही से आता ही नहीं है। न तो आप समय पर वर्षा करते हैं, न धूप देते हैं, और न ही हवाएँ चलाते हैं। आप की ही वजह से हमें बहुत ही कम पैदावार होती है। आप कैसे भगवान हैं?
भगवान उस व्यक्ति से कहते हैं-- मैं सभी कार्य सही तरह से करता हूँ। परन्तु तुम उन्हें गलत क्यों बता रहे हो?
वह किसान भगवान से कहता है अगर आप हर काम सही से करते हैं तो हमें पैदावार इतनी कम क्यों प्राप्त होती है। हम प्रयास तो ज्यादा करते हैं पर हमें इसका फल कम क्यों मिलता है।
भगवान उस व्यक्ति से कहते हैं। तुम जितना प्रयास करते हो तुम्हें उतना ही फल मिलता है। मैं कभी भी किसी को उसकी मेहनत से कम फल नहीं देता।
वह किसान भगवान से कहता है, बस बहुत हुआ। अब आप यह कार्य मेरे हाथों में सौंप दीजिए। क्योंकि आप नहीं जानते कि किस समय वर्षा करनी है, किस समय हवाओँ को चलाना है और किस समय धूप देनी है? आप सारी ही चीजें गलत समय पर करते हैं। अब कृपा कर इस जिम्मेदारी को मुझे दे दीजिए।
किसान की बात सुन भगवान मुस्कुराते हैं ओर कहते हैं, चलो तुम्हारी बात मैं मान लेता हूँ। और पूरी जिम्मेदारी किसान के हाथों में सौंप कर चले जाते हैं।
किसान अपनी मर्ज़ी से हवाएँ चलाता है, किसान अपनी मर्ज़ी से फसलों को सही मात्रा में धूप देता है। और दही मात्रा में वर्षा भी करता है। कुछ समय में ही फसलें खेतों में लहलहाने लगती हैं
किसान खुश होता है और मन ही मन सोचता है। कि अच्छा हुआ भगवान से यह कार्य मैने ले लिया। क्योंकि भगवान से तो यह ठीक से हो ही नहीं पा रहा था। कुछ दिनों के बाद फसल काटने का समय आता है। फसल काटी जाती है और किसान पहली बाली खोलकर देखता है। उसमें कुछ नहीं होता। वह दूसरी बाली खोलकर फेखता है। उसमें भी कुछ नहीं होता। वह धीरे धीरे छः सात बालियां खोलकर देखता है।परन्तु वह पाता है कि बालियों के भीतर गेहूं हैं ही नहीं। यह देख कर उसके पैरों के तले से जमीन खिसक जाती है। और वह चिल्लाने लगता है। भगवान तुमने मेरे साथ ये क्या किया? सब कुछ मैने समय पर किया। फसल भी इतनी हरी भरी थी। परन्तु यह क्या, यह अनाज तो दे ही नहीं रही है।
किसान की बात सुनकर भगवान उसके पास आते हैं और कहते हैं। अब क्या समस्या हुई भाई? किसान भगवान से कहता है, आपने मेरे साथ धोखा किया। मैंने अपनी फसलों को सारी सुविधाएं दी। फिर भी उनके अन्दर फल विकसित न हो सका। ऐसा क्यों? अब भगवान, जो उसकी बात सुनकर यहाँ पर जो कहते हैं वो बड़ा सुनने लायक है।
भगवान उस किसान से कहते हैं। फल का विकास सुविधाओं से नहीं होता। फल का विकास समस्याओं से होता है। तुमने समय पर वर्षा कराई, तुमने समय पर हवा चलाई, समय पर धूप दी। परन्तु तुमने एक बात को नजरअंदाज किया कि जब तक फसलों पर समस्या नहीं आएगी, तब तक वो विकास नहीं कर सकती।
भगवान उस किसान से कहते हैं। मैं तेज हवा चलाता था जिससे कि फलों की जड़ें धरती में अपनी पकड़ को मजबूत कर सकें। मैं समय पर वर्षा नहीं करता था जिससे कि फसलों की जड़ें पानी की तलाश में धरती में और गहरी जा सकें। मैं सभी चीजें उस मात्रा में करता था जिसमें फसलों को संघर्ष करना पड़े। समस्याओं का सामना करना पड़े। परन्तु तुमने ऐसा नहीं किया। तुमने फसलों को सुख सुविधाएं दी। जिससे उनका शरीर तो बड़ा हो गया परन्तु भीतर से उनका विकास न हो सका। आप जितने भी लोग अब मुझे सुन रहे हैं। मैं आप से कह रहा हूँ। आप मुझे एक भी, एक भी ऐसा उदाहरण दे दीजिए जिसके जीवन में समस्याएँ न आई हों। जिसके जीवन में परेशानियां न आई हों और वह एक स्कससफुल इंसान बना हो। आप नहीं दे सकते। क्योंकि स्क्सस सुविधाओं से नहीं मिलती। स्क्सस समस्याओं से मिलती है। मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि कहानी काल्पनिक है। परन्तु सच्चाई को दर्शाती है। हर स्थिति में आपके पास दो विकल्प होते हैं। या तो आप स्थिति को स्वीकार कर लें उसके लिए अपने आप को जिम्मेदार मानें और आगे बढें। या फिर हार कर बैठ जाएं ओर औरों को कोसते रहें। अपने जीवन की उस स्थिति को कोसते रहे। दोनों ही विकल्प आप के हाथ में हैं। एक आप को विकास की ओर ले जाता है और दूसरा आप की ही नजरों में आपको नीचे गिरा देता है। यह आपका निर्णय है कि आप को कौन सा विकल्प चुनना है।
समस्याएँ आपके और सफलता के बीच बाधा नहीं सीढियां हैं।
धन्यवाद
संग्रहकर्त्ता उमेद सिंह सिंघल।

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