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सद्गुरु जी हमने अवगुण बहुत करे - Sadguru ji hamne avgun bahut kare - Kabir ke shabd

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Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द

गुरु जी हमने अवगुण बहुत करे। दाता जी ।।
जितने पैर धरे धरणी में जी।
उतने ही जीव मरे।।

जितनी रे वस्तु आई नजर में जी।
मनसा पाप करे।।

पाप पोट की बांधी पोटलिया जी।
सिर पे धरें ही फिरे।।

धर्मिदास शरण सद्गुरु की जी।
भँव जल पार तरे।।

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