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साधना/साधना के लाभ/मन की संतुलित अवस्था - Sadhana / Benefits of Sadhana / Balanced state of mind

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साधना/साधना के लाभ/मन की संतुलित अवस्था

साधना के लाभ

साधना आरंभ करने तथा उसमें निरंतरता बनाए रखने के अनेक लाभ हैं । वास्तव में साधना आरंभ करते ही हमें कुछ न कुछ लाभ अथवा सकारात्मक परिवर्तन अनुभव होने लगता है । प्रत्येक सकारात्मक परिवर्तन से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सुख बढने में अथवा दुख घटने में सहायता मिलती है ।

मन की संतुलित अवस्था
हम सभी अत्यंत गतिशील जीवन जीते हैं । इस गतिशील दिनचर्या से समय निकालकर कदाचित ही कभी कोई पीछे मुडकर अपने जीवन के बारे में व्यापक दृष्टिकोण से विचार करता है ।

इस चित्र में नीले रंग की रेखा यह दर्शाती है कि धीरे-धीरे बाह्य परिस्थितियों से असंतुलित होने का परिमाण घटने लगता है । वास्तव में हमारी भावनात्मक स्थिति अधिक अनुकूल होने लगती है और हम नकारात्मक तथा सकारात्मक परिस्थितियों का सामना शांति से कर पाते हैं । साधन के विषय में हमारे ज्ञान में वृद्धि होने के कारण जीवन को हम और अधिक दार्शनिक दृष्टिकोण से देखने लगते हैं ।

इस संदर्भ में दो उदाहरण देखते हैं :

१. अपने व्यवसाय में जब कोई कलाकार, अभिनेता, माडॅल इत्यादि लोकप्रिय होने लगता है तब पूरा विश्‍व उसकी सराहना और समर्थन भी करता है । कुछ वर्ष उपरांत वह किसी घोटाले में उलझ जाता है । तब जिन लोगों ने उसकी सराहना की थी, वे किसी प्रमाण के बिना ही उस पर टीका-टिप्पणी कर अपना असंतोष व्यक्त करते हैं । शीघ्र ही लोग उसे भूल जाते हैं । किसी नए व्यक्ति को मंच पर बैठाकर उसकी स्तुति होने लगती है ।

लोगों का मत उस व्यक्ति के विषय में इतना परिवर्तित हो जाए तो उस समय उसकी विचार प्रक्रिया क्या होनी चाहिए ? यदि वह व्यक्ति स्थिर वृत्ति का हो, तो सराहना होने पर वह सोचेगा – ‘लोग मेरा बहुत सम्मान करते हैं; परंतु मुझे अपनी कमियां ज्ञात हैं और मैं स्वयं को सुधारने का प्रयास करता रहूंगा’ । आगे उन्हीं लोगों द्वारा उस पर दोषारोपण किए जानेपर भी यदि वह स्थिर हो, तब वह सोचेगा – ‘आज लोग मेरे विरुद्ध हैं; परंतु अंर्तमन में मैं और मेरे भगवान जानते हैं कि मैं निर्दोष हूं । इसलिए इन लोगों के शब्द मुझे विचलित नहीं कर सकते ।’

२. वर्तमान समय में विश्‍व की डांवाडोल अर्थ व्यवस्था के कारण नौकरी चली जाने की आशंका अधिक है । जो साधना कर रहे हैं वे अपनी संतुलित मानसिक स्थिति के कारण ऐसी विपरीत परिस्थिति में भी स्थिर रह सकेंगे क्योंकि उनकी श्रद्धा अपनी बैंक बैलेंसपर न होकर ईश्‍वर पर होती है । इसलिए वे ऐसी परिस्थिति में भी सकारात्मक रहते हैं और इसे एक नई शुरुआत का अवसर मानकर अपने परिवार को संभालने के लिए अधिक रचनात्मक और अभिनव योजना बनाते हैं । शांत मन ऊर्जा को बचाता है जिससे समस्याआें का समाना करने और उन्हें सुलझाने में सहायता मिलती है ।

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