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मौन से वचन व देह को स्थिर किया जा सकता है, मन को नहीं - Silence can stabilize speech and body, not mind

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मौन से वचन व देह को स्थिर किया जा सकता है, मन को नहीं’

व्यक्ति मौन से वचन को रोक लेता है, देह को भी स्थिर कर लेता है लेकिन मन इतना चंचल होता है कि उसको स्थिर करना कठिन है। मन को वश में करना कठिन है मन के दो रूप होते हैं भला और बुरा। हमारे मन को कोई दूसरा व्यक्ति नहीं बदल सकता हमें स्वयं ही उसे बदलना पड़ता है। मन जब धर्म की ओर लगता है तब निश्चित रूप से परिवर्तन होता है। यह बात अशोक मुिन ने कही। शासन दीपक राकेशमुनिजी ने कहा भक्त चार प्रकार के होते हैं आर्थ भक्त जो दु:खी होकर हमेशा दुखड़ा रोता रहता है। दूसरा अर्थाति जो धन-संपत्ति के लिए मन को लगाता रहता है, तीसरा जिज्ञासु ज्ञान प्राप्ति के लिए जो जिज्ञासा का समाधान करता रहता है। जो संतों के गुणों को ग्रहण करे और उनके जीवन को देखकर समाहित करने का भाव रखे, वह ज्ञानी भक्त कहलाता है। प्रणतमुनिजी, शासन दीपक सरोजबालाजी ने भी विचार रखे। मप्र इकाई अध्यक्ष राजमल पंवार, वित्त आयोग अध्यक्ष हिम्मत कोठारी, पुष्पा मूणत, चंदनमल पिरोदिया आदि उपस्थित थे। संघ अध्यक्ष चंदनमल छाजेड़, मंत्री सुदर्शन पिरोदिया व महेंद्र गादिया ने बताया नेमचंद कोठारी परिवार की ओर से 5-5 सामयिक व भोजन का कार्यक्रम रखा गया। शासन दीपक अशोकमुनिजी के प्रवचन सोमवार को 80 फीट रोड पर शांतिलाल पितलिया के निवास स्थान पर होने की संभावना है। संचालन नरेंद्र गादिया ने किया।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनि।

मुनि के प्रवचन आज 80 फीट रोड पर- मुनिश्री रामलालजी के सुशिष्य आज्ञानुवर्ती तपस्वीराज अशोक मुनिजी के प्रवचन सोमवार को 80 फीट रोड स्थित शांतिलाल पितलिया के निवास पर होंगे। जैन श्री संघ सज्जन मिल क्षेत्र के जयंत वोहरा ने बताया सुबह 9.15 बजे प्रवचन शुरू होंगे।

मेघचंद्रजी साधु मंडल का मंगल प्रवेश

रतलाम | सायर चबूतरा स्थित गुजराती उपाश्रय में मेघचंद्रजी, मुनि पद्मचंद्रसागरजी, मुनि ध्यानचंद्रसागरजी आदि साधु-साध्वियाें का मंगल प्रवेश हुआ। सभी साहू बावड़ी स्थित शेखर कांसवा के निवास पर नवकारशी कर गुजराती उपाश्रय पहुंचे। वहां मुनि पद्मचंद्र सागर ने कहा रतलाम धर्म नगरी के रूप में जैन जगत में विख्यात है। अति प्राचीन तीर्थ व 100 से अधिक दीक्षाएं नगरवासियों की हुईं। इससे यह संयम तीर्थ है। पारस भंडारी ने बताया पूज्यश्री के अल्प प्रवास के दौरान प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक गुजराती उपाश्रय में होंगे। आचार्य जिनचंद्र सागर, आचार्य हेमचंद्र सागर आदि मुनिजनों का मंगल प्रवेश 8 दिसंबर को रतलाम में होगा।

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