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तेरे बन्धन कटज्यां - tere bandhan kat jaya - Kabir ke shabd

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Kabir Ke Shabd 


कबीर के शब्द

तेरे बन्धन कटजा सारे, सत्संग में सुरता आया कर।
ये पांचों तेरे संग में, ये रल मिल खेले अंग में,
तूँ सुनले सुरता प्यारी, इन तैं ना प्रीत लगाया कर।।

ये पांचों चोर लुटेरे, इनै लूट लिए सब डेरे।
ये जन्म जन्म के वैरी, इन तैं ना प्रीत लगाया कर।।

तूँ मन्दिर पूजा करती, मालिक ने क्यों ना सुमरती।
तूँ हांडे मारी मारी, आंहे गम का भोजन खाया कर।।

तूँ चाहवै पार उतरना, मालिक का ले ले शरणा।
यो भवसागर का तरना, तूँ सूरत शब्द में लाया कर।।

तूँ चढ जा अटल अटारी, सद्गुरु ने लागै प्यारी।
राधा स्वामी अहम है भेदी,  चरणों मे शीश नवाया कर।।

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