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तूँ तो उड़ता पँछी यार - tu to udta panchi yaar - Kabir ke shabd

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Kabir Ke Shabd 


कबीर के शब्द

तूँ तो उड़ता पँछी यार, तेरा कौन करे इतबार।।
नो खिड़की का पिंजरा तेरा खुले पड़े सब द्वार।
आना आना मुश्किल तेरा, जाना सहज सुमार।।

तेरे कारण महल बनाए, संचे सुत धन नार।
सबको छोड़ जाए तूँ पल में, निर्मोही निर्धार।।

सुंदर भोजन नित खिलाऊँ, पहराउं सिंगार।
मल मल इत्र फुलेल लगाऊं, ना माने उपकार।।

कोट बनाऊं किला बनाऊं, बाँधूं बन्द हज़ार।
ब्रम्हांन्द रहे तूँ नाही, निकल जाए बलधार।।

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