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सुख भी मुझे प्यारे हैं - sukh bhi mujhe pyare hai - Kabir ke shabd

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सुख भी मुझे प्यारे हैं, दुःख भी मुझे प्यारे हैं।
छोडूं मैं किसे भगवन,दोनों ही तुम्हारे हैं।।
सुख दुख ही जीवन की,गाड़ी को चलाते हैं।
     सुख दुख ही तो हम को,इंसान बनाते हैं।
           संसार की नदियां के,दोनों ही किनारे हैं।।
दुःख चाहे ना कोई भी,सब सुख को तरस्ते हैं।
     दुःख में सब रोते हैं, सुख में सब हंसते हैं।
           सुख मिले जिसको,उसे दुःख भी तो प्यारे हैं।।
मैं कैसे कहूँ तुझ को,ये दे दो या वो दे दो।
      जो भी तेरी मर्जी हो,मर्जी से तुम वो दे दो।
           मैनें तो तेरे आगे,ये हाथ पसारे हैं।।
सुख में तेरा शुक्र करूँ,दुःख में फरयाद करूँ।
      जिस हाल में रखे मुझ को,उस हाल में याद करूँ।
            यादों में तेरी मै ने,ये गीत सवांरे हैं।।

          
          

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