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अनिश्चितता और परिवर्तन ही जीवन को पवित्र बनाते है - Uncertainty and change make life pure

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अनिश्चितता और परिवर्तन ही जीवन को पवित्र बनाते है


वर्ष बदलता है और कैलेंडर एक नया चक्र शुरू होता है । एक से सौ लिखने के बाद शुरूआत से एक घुटना ही पडता है। फिर से एक नई शुरुआत, कैलेंडर मानव के द्वारा एक ऐसी व्यवस्था वर्ष प्रारंभ होता है चैत्र से फाल्गुन – जनवरी से डिसेंबर ।

वर्ष बदलता है पर दिन नही बदलता। तारिख बदलती है पर सूरज तो युगो से सुबह ही उगता है।इन्सान ने खुद के कार्यो के लिए, खूद की उम्र के लिए, हिसाब किताब के लिए एक क्रम नक्की करा है और कैलेंडर बनाया। वर्ष बदलता है और परिवर्तन का एहसास करता है ।

अगर कैलेंडर ही नही होता तो ? पुरा वर्ष ही नही और नए वर्ष का प्रारंभ भी नही होता। जिंदगी मे जब तक नए का आरंभ नही होगा तब तक पुराना छूट नही सकता। और कैलेंडर ही परिवर्तन की नई अनुभूति करता है ।

मानव को सतत् कुछ नया करने की इच्छा होती है । बालको को speed से बडा होने की इच्छा होती है और बडा होने के बाद पुनः बालक बनने की अभिलाषा होती है । वो कागज की कश्ती, बारिश का पानी जैसे याद करने का मन हो जाता है । और बहुत सारे लोग भव्य भूतकाल की बाते करते रहते है।

एक महान वैज्ञानिक को संशोधन के बदले अवार्ड मिला। एक पत्रकार ने उनसे पूछा, आपके भूतकाल की भव्यता कैसी रही होगी? वैज्ञानिक ने उत्तर दिया- भूतकाल कभी भी भव्य नही होता। भव्यता से शोभायमान तो सदैव भविष्य काल होता है । भूतकाल की तो हमे खबर होती है और इसी कारण भव्य होने का एहसास होता है । क्योंकि इन्सान ने उसे जान लिया है और उसी कारण वह उससे अभिभूत हो जाता है । क्योंकि इन्सान मान लेता है – मै जानता हूँ, मै ज्ञानी हूँ। मै विद्वान हूँ। मै सच्चा हूँ। परन्तु जो अनजान आने वाला समय है वही भव्य है।

अरे विज्ञान मे कुछ भी नही है । परन्तु जिसको हम नही जानते थे और जानने की कला को ही हम विज्ञान कहते है । न्यूटन ने झाड पर से गिरते फल को देखकर गुरूत्वाकर्षण बल का नियम दिया । पर उसके पहले भी फल निचे ही आते थे । पर निचेे आने के कारण की शोध को ही नियम का रूप देकर कुछ नया बताया।

न्यूटन का नियम नया था। गुरूत्वाकर्षण बल नया नही था।आज भी Apple पेड से निचे ही गिरता है। कल भी निचे ही गिरता था। विश्व मे बहूत सारी चीजे ऐसी है जिनकी हमको जानकारी नही है । और भविष्य भी अस्पष्ट वेटिंग मे है। इसलिए भविष्य की मजा अनिश्चितता है ।

आज का आनन्द लो कल किसने देखा है। ऐसे गीत वर्षो से गाए जा रहे है। कुल हमने देखा ही नही तो हम कल मेसे मुक्ति नही ले सकते। नही जाना था जानकी नाथ सुबह क्या होने वाला है। सुबह जो होने वाला है वो तो होगा एक बात तो fix है सुबह का सुरज उगेने वाला ही है।

डायरी हमेशा इस बात की गवाही देती है ही इन्सान सतत् आने वाले कल के साथ जुड़ा है। कल सुबह पाँच बजे मुझे बाहर जाना है। दस दिन के बाद विदेश जाना है। टिकिट बुक करना है। उस date को बेटी की शादी है। next month परिक्षा है। हम कितने दिन, कितने महिने और कितने साल की planning करते है। कल हमने नही देखा पर हमारी प्लानिंग सालो की है। अनिश्चितता की यही तो मजा है ।

किसी फिलोसफर ने बडे ही मजे की बात कही है – अनिश्चितता को एण्जोय करो। जो इन्सान अनिश्चितता के मजे नही लेता वो कही ना काही उलझा रहता है। जो भी होने वाला है वह अनिश्चित है। या तो वह अच्छा होगा या फिर खराब होगा परन्तु इन्सान को खराब विचार ज्यादा है । खराब का डर ज्यादा लगता है । जिंदगी के वर्षो पर अगर हम नजर डाले तो पायेंगे कि जिंदगी मे जितना भी खराब हुआ है उससे कई गुना ज्यादा अच्छा हुआ है। और आगे जो भी होगा वह भी अच्छा होगा तो डर किस बात का ।

भविष्य के गर्भ मे अनिश्चितता है। भावि के गर्भ मे परिवर्तन है। थोडा सा विचार अगर आप करोगे समय के साथ मे तो पायेंगे कि हमारे जीवन मे कितने ही परिवर्तन आए है। स्कूल बदलता है, शहर बदलता है। अरे तो हम क्या कम बदले है? अरे जब हम छोटे थे तब नानी माँ कहते थे कि “12 मे बढिया और “16 मे शान ये सारी बाते हमे बहुत सूचना देती है । उम्र के साथ साथ बुद्धि और समझ आनी ही चाहिए । किसी को उम्र के साथ बुद्धि आती है तो किसी को ठोकर खाकर आती है ।

अरे मानव है तो भुल तो होनी ही है। जो कुछ करता है भुल उसी से होनी है । ऐसा कोई इन्सान नही जिससे जिंदगी मे कभी भूल नही हुई होगी। जो इन्सान जीवन मे गलती करके उसे सुधारे वही इन्सान जीवन मे सच्चा इन्सान है ।

वर्ष बदलेगा, कैलेंडर मे परिवर्तन होगा। विक्रम संवत एक कदम आगे बढेगा । और इसी के साथ वर्ष समापन का काउन्ट डाउन स्टार्ट होगा। बस जीवन मे हम परिवर्तन को माने, अनिश्चितता को स्वीकार करे।साथ ही जीवन मे परिवर्तन के साथ प्रेम करना सिखो।

” जिंदगी मे कितने पल है उसकी चिंता करने के बजाय, हर पल मे कितनी जिंदगी है उसका आनंद मानो” ।।

और अगर हम इसे जीवन मे उतार लेंगे तो हमारा हर पल अमर बन जाएगा ।

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