भला हे दिन ऊग्या।।

भला हे दिन ऊग्या हे म्हारै सद्गुरु आए आज।।
सद्गुरु आँगन आए, म्हारै ज्ञान घमशान मचाए।
म्हारे उर में आन समाए हे, म्हारै टूटी कुल की लाज।।
सद्गुरु दिया दीदारा, वा की महिमा अपरम्पारा।
सखी सन्त लिया अवतारा हे म्हारे बिगड़े सुधर गए काज।।
वाणी विवेक सुनाई, म्हारै घट में हुई रुसणाई।
म्हारै भर्म रहा कुछ नाहीं, हे म्हारे संकट गए भाग।।
गुरु नाथ गुलाब समझावै, मोहे सन्त समागम भावै।
म्हारे सद्गुरु पार लगावैं, हे तुम बैठो अगम की जहाज।।

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