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| Kabir Ke Shabd |
कबीर के शब्द
मेरा मन वैरागी-२, हुआ री मेरी माँ।
यो सँसार ओस जैसा मोती,
धूप लगे उड़ जाए मेरी माँ।।
मेरा मन।
यो सँसार मिट्टी का ढेला,
बूंद लगे गल जाए मेरी माँ।।
बूंद लगे गल जाए मेरी माँ।।
यो सँसार कागज की पुड़िया,
हवा चले उड़ जाए मेरी माँ।।
कह मीरा रविदास की चेली,
भक्ति में शक्ति समाई मेरी माँ।।
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