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रविवार, 18 दिसंबर 2022

कहानी - तपोबल माँ, मुझे उतना ही मीठा दूध पिलाओ। उपमन्यु घर आकर माँ की गोद में बैठ गया। उसने अभी थोड़ी देर पहले अपने मामा के लड़के को दूध पीत...
सत्य-पालन की दृढ़ता अयोध्या-नरेश महाराज हरीशचंद्र ने स्वपन में एक ब्राह्मण को अपना राज्य दान कर दिया था। जब वह ब्राह्मण प्रत्यक्ष आकर राज्य ...

मंगलवार, 23 अगस्त 2022

तनिक-सा भी असत्य पुण्य को नष्ट कर देता है। महाभारत के युद्ध में द्रोणाचार्य पाण्डव -सेना का संहार कर रहे थे। ये बार-बार दिव्यास्त्रों का प्र...

शनिवार, 25 जून 2022

सम्मान तथा मधुर भाषण से राक्षस भी वशीभूत  एक बार एक बुद्धिमान्‌ ब्राह्मण एक निर्जन वन में घूम रहा था। उसी समय एक राक्षस ने उसे खाने की इच्छा...
विचित्र आतिथ्य - W ondrous Hospitality महर्षि दुर्वासा अपने क्रोध के लिये तीनों लोक में विख्यात हैं। एक बार वे चीर धारण किये, जटा बढ़ाये, बि...
सत्कार से शत्रु भी मित्र हो जाते हैं पाण्डवों का वनवास-काल समाप्त हो गया। दुर्योधन ने युद्ध के बिना उन्हें पाँच गाँव भी देना स्वीकार नहीं कि...
सेवा-निष्ठा का चमत्कार मर्यादा पुरुषोत्तम विश्व सम्राट्‌ श्रीराघवेन्द्र अयोध्या के सिंहासन पर आसीन थे। सभी भाई चाहते थे कि प्रभु की सेवा का ...
सच्ची क्षमा द्वेष पर विजय पाती है राजा विश्वामित्र सेना के साथ आखेट के लिये निकले थे। वन में घूमते हुए वे महर्षि वसिष्ठ के आश्रम के समीप पहु...
शोक के अवसर पर हर्ष क्यों ? ( श्रीकृष्णका अर्जुनके प्रति प्रेम)  भीम का महावीर राक्षसपुत्र घटोत्कच मारा गया पाण्डव् शिविर में शोक छाया है, स...

शुक्रवार, 24 जून 2022

विलक्षण दानवीरता - Prodigious Charity कर्ण का वास्तविक नाम तो वसुषेण था। माता के गर्भ से वसुषेण दिव्य कवच और कुण्डल पहिने उत्पन्न हुए थे। उन...
Strange Test - विचित्र परीक्षा एक समय श्रीमद्राघवेन्द्र महाराजराजेंद्र श्रीरामचन्द्र ने एक बड़ा विशाल अश्वमेध यज्ञ किया। उसमें उन्होंने सर्व...
दूसरों का अमंगल चाहने में  अपना अमंगल पहले होता है  देवराज इन्द्र तथा देवताओं की प्रार्थना स्वीकार करके महर्षि दधीचि ने देह त्याग किया। उनकी...
आखेट तथा असावधानी का दुष्परिणाम अनेक बार तनिक-सी असावधानी दारुण दुःख का कारण हो जाती है। बहुत-से कार्य ऐसे हैं, जिनमें नाम मात्र की असावधानी...
वह सत्य सत्य नहीं, जो निर्दोष की हत्या में कारण हो सैकड़ों साल बीत गये, किन्हीं दो नदियों के पवित्र संगम पर एक तपोधन ब्राह्मण रहते थे। उनका ...
ईमानदार व्यापारी महातपस्वी ब्राह्मण जाजलि ने दीर्घ काल तक श्रद्धा एवं नियमपूर्वक वानप्रस्था श्रम धर्म का पालन किया था। अब वे केवल वायु पीकर ...