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सोमवार, 13 फ़रवरी 2023

कबीर भजन तन का तनिक भरोसा नाहीं, काहे करत गुमाना रे। टेढ़ चले मरोड़ मूंछे, विषय याहि लिपटाना रे। ठोकर लगे चेतकर चलना,कर जान प्रान पियारा रे।  ...
कबीर यो संसार पाप यो संसार पाप का बंधन,तोड़ लिए जै टॉ सकै तै उस ईश्वर से नाता बन्दे, जोड़ लिए जै जोड़ सके तै पाप मूल अभिमान बतावे दया धर्म का म...
कबीर भजन श्याम कल्याण हरि का ध्यान धरे है भाई, तेरी बिगड़त बात बन जाई। मीरा तारेउ गनिका तारेउ सदन कसाई सुआ पढ़ावत गनिका तारो तारो मीराबाई दौ...
Kabir ke Shabd कबीर भजन श्याम कल्याण पीले प्याला हो मतवाला प्याला, नाम अमिट रस का रे। बालापन सब खेल गंवाया, तरुण भयो बरा नारि का वृद्ध भयो क...
Kabir ke Shabd बंजारन अँखियाँ खोल, टांडा तेरा किधर चला। क्या सोवै उठ जाग दीवानी, आगै गारत गोल।। तूँ गहले गफलत के माते, तेरी चीज है वस्तु अमो...
Kabir ke Shabd बिचालै बैठ लेना हे सुरतां , लगना परले पार।। सद्गुरु के दरबार में, लम्बा पेड़ खजूर। चढ़ै तो मेवा चाख ले हे, पड़े तो चकनाचूर।। मा...
Kabir ke Shabd मैं चरणों का दास गुरु जी मेरे मन का विकार मिटादे। कर सेवक पे मेहर फेर गुरु,अपना देश दिखादे।। मैं तो गन्दे जल का नाला था,मुझे ...
कबीर भजन कव्बाल सतगुरु फकत जगत में दुख को छुड़ाने वाले भव सिन्धु मैं कटुम्ब के सब है डुबाने वाले। माता पिता तुम्हारे त्रिया और सुत विचारे, स...
कबीर भजन काया कल्प सौदा करे सो जाने काया गढ़े खूब बाजार। टेक या काया में साट लगाते बैठे साहूकार, या काया में चोर फिरत हैं लूच्चा ढीट लबार या...
कबीर भजन चेतावनी प्यारे प्रपंच में तो दिन रात तुम गुजारो, मानुष का तन ये पाके कूद्ध जो जरा विचारा। दो दिन का ये बसेरा करते हो मेरा। सब छोड़ ...
Kabir ke Shabd गुरू बिन मुक्ति ना, चाहे करले जतन हजार।। गुरु बिन ज्ञान, ज्ञान बिन मुक्ति। आशा तृष्णा ना तेरी रुकती। मिटता ना अहंकार।। गुरु व...
Kabir ke Shabd तुंही-२ याद मोहे आवै रे दर्द में।। लख चौरासी भटकत भटकत, मार पड़े भग जावै रे दर्द में।। सुख सम्पत्ति का सब कोय साथी दुःख में नि...
Kabir ke Shabd संगत तो करले साध की, जामे उपजै सै आत्मज्ञान।। जल देखे सुख उपजै जी, साधु देखे ज्ञान। माया देखे लोभ उपजै जी, त्रिया देखे काम।। ...
Kabir ke Shabd नारायण -२बोल तोते नारायण -२ बोल। हरी पंख तेरी चोंच केशरी, कण्ठा लाल कपोल।। तूँ तो है पखेरू बेटा, वनों का है वासी प्यारे। जंगल...
Kabir ke Shabd बिन सद्गुरु पावै नहीं, जन्म धराओ सो सो बार।। चाहे तो लोटो धरण में हेली री, सुन्न में बंगला छाय। लटा बढ़ाओ चाहे शीश पे, नाद बजा...
Kabir ke shabd तजो अविद्या नींद इब तो जाग जा न तूँ। तूँ दाग जिगर का धोले, दिन दिन घटता आवै भोले। किसी वैध हकीम ने टोहले जल्दी भाग जा न तूँ।।...
Kabir ke Shabd गन्दी खोड़ अंधेरी तेरी रे, बिना गुरू के ज्ञान मूर्ख क्यूँ भरमाया रे। टेढ़ा चालै मरोड़ दिखावै, करता फिरै गुमान। देह चलावा हंस बटे...