शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

कबीर सद्गुरु अपने कै - Kabir saduguru apne ke.


कबीर सद्गुरु अपने कै।



सद्गुरु अपने कै, दाता अपने कै, सन्मुख रहना।
जग में लाज रहो ना रहो रे।।

घट का पर्दा खुल भी गया तो,  हाथ में माला रहो न रहो रे।
नाचन लागी तो घूंघट कैसा, अपना पराया कोए खड़ा भी रहो रे।

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