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Dhammapada Quotes in Hindi धम्मपद के अनमोल वचन

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Dhammapada Quotes in Hindi धम्मपद के अनमोल वचन 
जैसा कि आपको पता होगा धम्मपद बौद्ध साहित्य का एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है. जिस प्रकार महाभारत में श्री मदभागवतगीता छोटा-सा ग्रन्थ है, उसी प्रकार बौद्ध साहित्य में धम्मपद भी छोटी-सी पुस्तक के रूप में है. बौद्ध साहित्य में इसका महत्व सर्वाधिक है. गीता की तरह विश्व की सभी भाषाओँ में इसका अनुवाद हो चुका है. प्रस्तुत पोस्ट Dhammapada Quotes in Hindi में धम्मपद के कुछ अनमोल वचन को आपके लिए संग्रहीत किया गया है.
Dhammapada Quotes in Hindi धम्मपद के अनमोल वचन 
1. बुरे कर्म, और अपने आप के लिए हानिकारक कर्म करना आसान है; जो अपने लिए अच्छा और फायदेमंद है, वह कार्य करना बहुत मुश्किल है.
2. जब तक पाप कर्मफल नहीं देता, मनुष्य उसे शहद के समान समझता है. जब पाप कर्मफल देता है, तो उसे नष्ट कर देता है.
3. जिस प्रकार ठोस पर्वत हवा से कंपाययान नहीं होता, उसी प्रकार पण्डित लोग निंदा और प्रशंसा से विचलित नहीं होते.
4. न दूसरों के दोष, न दूसरों के कृत-अकृत को देखें. मनुष्य को चाहिए कि वह अपने ही कृत-अकृत को देखे.
5. क्रोध को अक्रोध से, बुराई को भलाई से कृपणता को दान से, झूठ को सच से जीतें.
6. जिस प्रकार कुश यदि ठीक से ग्रहण न किया जाए तो हाथ को छेद देता है. उसी प्रकार संन्यास का यदि ठीक से पालन न किया जाए तो नर्क में ले जाता है.
Let each man direct himself  first to what is proper, then let him teach others, thus a wise man won’t suffer.

7. वाणी कितनी भी मधुर क्यों न हो परन्तु यदि करनी, कथनी के अनुकूल नहीं है तो वह उसी तरह व्यर्थ है, जैसे गंधहीन सुंदर फूल.
8. वैर से वैर कभी समाप्त नहीं होता, यह सनातन धर्म है.
9. दुराचारी और असंयत रह कर सौ वर्ष तक जीवित रहना निरर्थक है. किन्तु सदाचारी और संयत रह कर एक दिन का जीवन श्रेष्ठ है.
10. न अतीत के पीछे दौड़ो 

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