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हम मूर्ख क्यों बने-Why we became fool

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हम मूर्ख क्यों बने

एक विचारशीला भगवदभक्त नारी का एक मात्र पुत्र मर गया । पति घर से बाहर गये थे । उस नारी ने पुत्र का शव ढक दिया और पति के लिये भोजन बनाया। परिश्रम से हारे थके पतिदेव घर लौटे। आते ही उन्होंने पूछा…अपने बीमार पुत्र की क्या दशा है ? 

स्त्री बोली- आज़ वह पूरा विश्राम कर रहा है । आप भोजन करे।


पुरुष ने हाथ-पैर धोया और भोजन करने बैठा । नारी उसे पंखे से वायु करने लगी । पंखा झलते हुए वह बोली- मेरी पड़ोसन ने मुझसे एक बर्तन माँगा था । मैंने उसे बर्तन दे दिया । अब मैं उससे अपना बर्तन माँगती हूँ

तो वह बर्तन देना नहीं चाहती उलटे रोने-चिलाने लगती है ।  पुरुष हँसता-बडी मूर्ख है वह ! दूसरे की वस्तु लौटाने में रोने का क्या काम पुरुष भोजन समाप्त कर चुका था । उसे हाथ धुलाते हुए स्त्री बोली-स्वामी ! अपना लड़का भी तो अपने पास भगवान की धरोहर ही था । प्रभु ने आज अपनी वस्तु ले ली है किंतु इसमें रो-चिल्लाकर हम मूर्ख क्यों बनें। तुम ठीक कहती हो देवि ! पुरुष ने गम्भीरता पूर्वक पत्नी की ओर देखा।

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