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रविवार, 3 मई 2020

लोभ का फल -result of greediness

लोभ का फल

एक किसान के बगीचे में अंगूर का पेड़ था । उसमें प्रत्येक वर्ष बड़े मीठे-मीठे अंगूर फल्लते थे । किसान बड़ा परिश्रमी संतोषी और सत्यवादी था । उसने सोचा कि बगीचा तो मेरे श्रम की देन है, पर भूमि मेरै जमीदार की है इन फलों में उसे भी कुछ-न-कुछ भाग मिलना चाहिये नहीं तो, मैं ईश्वर के सामने मुख दिखाने योग्य नहीं रहूँगा। ऐसा सोचकर उसने प्रतिवर्ष भूमिपति के घर कुछ मीठे-मीठे अंगूर भेजना आरम्भ किया। 

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Result of Greediness

जमींदार ने सोचा कि अंगूर का पेड़ मेरी जमीन में है इसलिये उस पर मेरा पूरा-पूरा अधिकार है । मैं उसे अपने बगीचे में लगा सकता हूँ । लोभ के अंधकार में उसे सत्कर्तव्य का ज्ञान नहीं रह गया। उसने अपने नौकरों कोआदेश दिया कि पेड़ उखाड़कर मेरे बगीचेमें लगा दो 5 नौकरों ने मालिक की आज्ञा का पालन किया। बेचारा किसान असहाय था वह सिवा पछताने के और कर ही क्या सकता था! पेड़ जमींदार के बगीचे में लगा दिया गया पर फल देने की बात तो दूर रही, कुछ ही दिनों मेँ वह सूखकर दूँठ हो गया और लोभ के कीड़े ने उसकी उपादेयता को जड़ से उखाड दिया । …रा० श्री० 

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