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संसर्ग से गुण-दोष-virtue-fault by connection

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संसर्ग से गुण-दोष 

एक राजा घोड़े पर चढा वन में अकेले जा रहा था ! जब वह डाकू भीलों की झोंपडी के पास से निकला, तब एक भील के द्वार पर पिंजरे में बंद तोता पुकार उठा…दोडो ! पकडो ! मार डालो इसे ! इसका घोडा छीन लो! इसके गहने छीन लो? 

राजा ने समझ लिया कि वह डाकुओं की बस्ती में आ गया है । उसने घोड़े को पूरे वेग से दौडा दिया । डाकू दौडे सही किंतु राजा का उत्तम घोडा दूर निकल गया कुछ ही क्षण मे। हताश होकर उन्होंने पीछा करना छोड दिया । 

आगे राजा को मुनियों का आश्रम मिला। एक कुटी के सामने पिंजड़े में बैठा तोता उन्हें देखते ही बोला- आइये राजन्! आपका स्वागत है ! अरे ! अतिथि पधारे हैं ! अर्व्य लाओ ! आसन लाओ !' 

कुटी में से मुनि बाहर आ गये । उन्होंने राजा का स्वागत किया। राजा ने पूछा- एक ही जाति के पक्षियों मे स्वभाव में इतना अन्तर क्यों? 

मुनि के बदले तोता ही बोला…'राजन्! हम दोनों एक ही माता-पिता की संतान हैं किंतु उसे डाकू ले गये और मुझें ये मुनि ले आये। वह हिंसक भीलॉं की प्राणियों में गुण या दोष आ जाते हैं । 

बातें सुनता है और मैं मुनियोंके वचन सुनता हूँ । आपने  स्वयं देख ही लिया कि किस प्रकार सङ्ग के क्यों 

५सु० सिं० 

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