*असली पुजारी*
*एक विशाल मंदिर था। उसके प्रधान पुजारी की मृत्यु के बाद मंदिर के प्रबंधक ने नए पुजारी की नियुक्ति के लिए घोषणा कराई और शर्त रखी कि जो कल सुबह मंदिर में आकर पूजा विषयक ज्ञान में अपने को श्रेष्ठ सिद्ध करेगा, उसे पुजारी रखा जाएगा। यह घोषणा सुनकर अनेक पुजारी सुबह मंदिर के लिए चल पड़े। मंदिर पहाड़ी पर था और पहुंचने का रास्ता कांटों व पत्थरों से भरा हुआ था। मार्ग की इन जटिलताओं से किसी प्रकार बचकर ये सभी मंदिर पहुंच गए।*
*प्रबंधक ने कहा- ज्ञान और अनुभव व्यक्तिगत होते हैं, जबकि मनुष्यता सदैव परोन्मुखी होती है। अपने स्वार्थ की बात तो पशु भी जानते हैं, किंतु सच्चा मनुष्य वह है, जो दूसरों के लिए अपना सुख छोड़ दे प्रबंधक की इस बात में पुजारियों को अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया।*

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