स्वेच्छाचारी न बनो
प्राचीन काल में एक पवित्र विचार वाला साधु था। वह कहा करता था कि संसार में स्वेच्छाचारी व्यक्तियों को ही दुःखों का सामना करना पड़ता है। जो व्यक्ति इच्छा पर काबू रखता है, वह हमेशा सुखी रहता है। एक बार साधु को खीर खाने की इच्छा हुईं। वह एक सदगृहस्थ से बोला - आज मुझे खीर खाने की इच्छा हो रही है।
इच्छा के आधीन न होना ही बड़ी तपस्या है। शुभेच्छा और दुरिच्छा का विवेक रहना आवश्यक है। यह सुनकर गृहस्थ भी इच्छा पर काबू रखने लगा और आध्यात्मिक उन्नति करता गया।

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