शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

विजया एकादशी की कथा | श्रीराम की विजय से जुड़ा पावन व्रत

विजया एकादशी की कथा

विजया एकादशी की कथा में भगवान राम, लक्ष्मण और वानर सेना समुद्र तट पर दालभ्य मुनि से मार्गदर्शन लेते हुए


यह कथा उस समय की है जब भगवान श्रीराम वानर सेना के साथ सिंधु तट पर पहुँचे। समुद्र विशाल था और आगे बढ़ने का मार्ग रुक गया। उसी स्थान के पास दालभ्य मुनि का आश्रम था, जो चिरंजीवी थे और अनेक ब्रह्माओं को अपनी आँखों से देख चुके थे।

दालभ्य मुनि का उपदेश

भगवान राम, लक्ष्मण और वानर सेना मुनि के दर्शन हेतु आश्रम पहुँचे। शरण में जाकर मुनि को दंडवत प्रणाम किया और समुद्र पार करने का उपाय पूछा। तब दालभ्य मुनि बोले—

“कल विजया एकादशी है। यदि आप सेना सहित इसका व्रत करें, तो समुद्र से पार होने और लंका विजय का मार्ग सरल हो जाएगा।”

विजया एकादशी का व्रत

मुनि की आज्ञा से भगवान राम और लक्ष्मण ने पूरी वानर सेना सहित विजया एकादशी का व्रत किया। उन्होंने श्रद्धा भाव से रामेश्वर भगवान का पूजन किया और एकादशी के नियमों का पालन किया।

विजय का फल

विजया एकादशी के प्रभाव से भगवान राम समुद्र पार करने में सफल हुए और अंततः लंका पर विजय प्राप्त की। इस व्रत के माहात्म्य को सुनने मात्र से ही व्यक्ति को जीवन में विजय प्राप्त होती है।

निष्कर्ष

विजया एकादशी का व्रत धर्म, विश्वास और विजय का प्रतीक है। जो भक्त श्रद्धा से इस कथा को सुनता या पढ़ता है, उसे हर कार्य में सफलता और विजय प्राप्त होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: विजया एकादशी का व्रत कब आता है?
उत्तर: यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आता है।

प्रश्न 2: विजया एकादशी क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: इस व्रत से हर प्रकार की बाधाओं पर विजय प्राप्त होती है।

प्रश्न 3: इस व्रत से क्या फल मिलता है?
उत्तर: सफलता, विजय और मनोकामना पूर्ति।

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