कबीर दोहावली ४ सबै रसाइण मैं क्रिया, हरि सा और न कोई । तिल इक घर मैं संचरे, तौ सब तन कंचन होई ॥ 301 ॥ हरि-रस पीया जाणिये, जे कबहुँ न...
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सोमवार, 18 सितंबर 2017
कबीर दोहावली ३ - 300-kabir ke Dohe.
umed singh
सितंबर 18, 2017
कबीर दोहावली ३ ते दिन गये अकारथी, संगत भई न संत । प्रेम बिना पशु जीवना, भक्ति बिना भगवंत ॥ 201 ॥ तीर तुपक से जो लड़े, सो तो शूर न...
मंगलवार, 12 सितंबर 2017
कबीर दोहावली २ तब लग तारा जगमगे, जब लग उगे न सूर । तब लग जीव जग कर्मवश, ज्यों लग ज्ञान न पूर ॥ 101 ॥ आस पराई राख्त, खाया घर का ...
कबीर दोहावली - दुख में सुमरिन सब करे, सुख मे करे न कोय ।
umed singh
सितंबर 12, 2017
कबीरदास कबीर दोहावली १ दुख में सुमरिन सब करे, सुख मे करे न कोय । जो सुख मे सुमरिन करे, दुख काहे को होय...