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| Kabir Ke Shabd |
कबीर के शब्द
मोहे सद्गुरु मिले दलाल, सौदा खूब मिला।
जन्म जन्म के बंधन काटे, निकट न आवे काल।
पांच तीन की खटपट मेटी,खावे ना केशरी श्याल।
भूल अविधा सारी भागी,भ्र्म दियो सब टाल।
सद्गुरु मंगत देवे निशाना,भागे अज्ञान तत्काल।
सत्यानंद पे कृपा किन्ही,किया आवागमन बहाल।
जन्म जन्म के बंधन काटे, निकट न आवे काल।
पांच तीन की खटपट मेटी,खावे ना केशरी श्याल।
भूल अविधा सारी भागी,भ्र्म दियो सब टाल।
सद्गुरु मंगत देवे निशाना,भागे अज्ञान तत्काल।
सत्यानंद पे कृपा किन्ही,किया आवागमन बहाल।
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