गुरुवार, 2 फ़रवरी 2023

तजो अविधा निंन्द इबतो, जाग जा न तूँ

Kabir ke Shabd

तजो अविधा निंन्द इबतो, जाग जा न तूँ।
तूँ दाग जिगर का धोले, दिन दिन घटता आवै भोले।
किसी वैद्य हकीम ने टोहले, जल्दी भाग जा न तूँ।।

पी के राम नाम की भंग ने, चढ़ जा नशा देखले रंग ने।
तूँ तजदे नियत कुसंग ने बिलकुल त्याग जा न तूँ।।

मन प्रधान पाँच हैं नारी, दिन भर होती फिरें खंवारी।
सत्संग में डट जा सारी, नेड़े लाग जा न तूँ।।

कहहरिदास रहो मतखाली जग में करले तूँ धर्म दलाली।
सत्त की भर ले रफल दुनाली बेशक दाग जा न तूँ।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें