शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2023

प्रीत उसी से कीजिये, जो ओड़ निभावै

Kabir ke Shabd

प्रीत उसी से कीजिये, जो ओड़ निभावै।
बिना प्रीत का मानवा, कहीं, ठौर न पावै।।

नाम स्नेही जब मिले, तब ही सत्त पावै।
अजर अमर घर ले चलो, भँव नहीं आवै।।

जो पानी दरयाव का दूजा न कहावै।
हिल मिल एकै हो रहा, सद्गुरु समझावै।।

दास कबीर विचार कै कह कह समझावै।।

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