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| Kabir Ke Shabd |
कबीर के शब्द
बन्दे हरि का गुण ना गाया, तनै वृथा ए जन्म गंवाया।।
तेरा गर्भ बीच था वासा, ला रहा था हरि में आशा।
जो वादा करके आया, दुनिया में आके भुलाया।।
बन्दे विषयों में भरमाया, ना जोड़ कतई तनै लाया।।
तनै कर्म करा सब खोटा, तेरै हरि नाम का टोटा।
तनै ठग रही ठगनी माया, तेरे बाहर ने जाल बिछाया।।
कह सुरेश मन्डोले आले, तूँ ध्यान हरि में लाले।
तेरी माटी में मिलजा काया, सब रहजा धरा धराया।।
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