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जतन बिना मृगां ने खेत उजाड़ा जी-Kabir Ke Shabd-jatan binaa mrigaan ne khet ujaadaa ji।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
जतन बिना मृगां ने खेत उजाड़ा जी।
पाँच मृग पचीस मृगाणी, तामें तीन शिकारा।
अपने -२ रस के भोगी, चुगा चुगें न्यारा न्यारा रे।।

उठ-२ झुंड मृगां के धाए, बैठे खेत मंझारा।
हो हो करते बाल ले भागे, मुँह बांए रखवारा।।

मारा मरै टरै नहीं टारा, बिडरे नहीं बिडारा।
अति प्रपंच महा दुखदायी, तीन लोक पचिहारा।।

ज्ञान का भुला, सूरत का चुका, गुरु का शब्द रखवाला।
कह कबीर सुनो भई साधो, विरला भले ही सम्भाला।।

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