काया का पिंजरा डोले रे, सांस का पंछी बोले रे-Kabir Ke Shabd-kaayaa kaa pinjraa dole re, saans kaa panchhi bole re।।
Monday, April 20, 2020

काया का पिंजरा डोले रे, सांस का पंछी बोले रे-Kabir Ke Shabd-kaayaa kaa pinjraa dole re, saans kaa panchhi bole re।।

SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
काया का पिंजरा डोले रे, सांस का पंछी बोले रे।।
ले के साक्षी जाना है, और जाने से क्या घबराना है।
ये दुनिया मुसाफिर खाना है, तूँ जाग जगत ये सोले रे।।

कर्म अनुसारी फल ले रे, और मनमानी अपनी करले रे।
तेरा घमंड सारा झडले रे, अभिमानी मान क्यूँ डोले रे।।

मातपिता भाईबहन पतिपत्नी, कोई नहीं तूँ किसी का रे
कह कबीर झगड़ा जीते जी का,अब मन ही मन क्यूँ डोले रे।।

No comments:

Post a Comment

Youtube Channel Image
Accountax Solutions Subscribe To watch more Tutorials
Subscribe