रविवार, 8 अगस्त 2021

सद्गुरु शरणें आए, राम गुण गाए रे - कबीर का दोहा

Kabir ke Shabd

सद्गुरु शरणें आए, राम गुण गाए रे।
तेरो अवसर बीता जाए, फेर पछताए रे।।

भुला तूँ नरक द्वार, मांस ना बीच रे।
तूने किया था कौल करार, बिसर गया मीत रे।।

लागा तेरै लोभ अपार, माया के मद थका।
बन्धग्या रे बन्धन अपार, नाम नहीं तूँ ले सका।।

माया बन अंधा भया, मृग जल डूब रे।
तूँ तो भटकत फिरे रे गंवार, माया के रूप रे।।

मोह को करके मैल स्वान ज्यूँ भोंक मरा।
यो शुद्ध स्वरुप बिसार, चौरासी लख फिरा।।

ये जग है मूढ़ अज्ञान, कार शुद्ध ना करे।
भानानाथ बिना नाम, कारज कैसे सरे।।

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