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मंगलवार, 10 अगस्त 2021

सुन हंसा भाई, हंस रूप था जब तूँ आया - दोहे कबीर के

कबीर दास के उलटा बानी

Kabir ke Shabd

सुन हंसा भाई, हंस रूप था जब तूँ आया।
अपना रूप भूल में भुला, जब तूँ जीव कहाया।।

कर्मों के फंदे में फँसके, असली तत्व भुलाया।
सत्त तत्व में आय मिला,जब मिली माटी की काया।।

तूँ मिला तो गर्जी मिल्या, माया जाल फलाया।
अपना स्वार्थ सिद्ध करने को, झूठा लाल मिलाया।।

योग तपस्या करी बहुत सी, करता तीर्थ काया।
जबतक मिला ना गुरू पारखी, जन्म-२ दुख पाया।।

साहिब कबीर गुरू मिले पारखी, जिनने यो इल्म बताया
धर्मिदास जब आपा चेता, मिट गया दिल का दावा।।

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